Thursday, 29 August 2013

जो कहे मैं जानता हूँ, जान लेना कि वह कुछ नहीं जानता


ओशो के अनुसार दुनिया में ज्ञानी कोई नहीं है, सभी अज्ञानी हैं ।
अज्ञानी, उनका कहना रहा कि दो तरह के होते हैं - एक, जिनको पता है और दूसरे वे जिनको यह नहीं पता है । ओशो ने कहा कि जिनको अपने अज्ञान का पता है, उन्हीं को ज्ञानी कहा जाता है; और जिनको अपने अज्ञान का पता नहीं, उन्हें अज्ञानी कहा जाता है । बाकी हैं दोनों ही अज्ञानी !
सुकरात ने कहा है कि जब मैंने जान लिया कि मैं कुछ भी नहीं जानता हूँ, उसी दिन प्रकाश हो गया ।
उपनिषद कहते हैं कि जो कहे मैं जानता हूँ, जान लेना कि वह कुछ नहीं जानता; जो कहे कि मुझे कुछ पता नहीं, उसका पीछा करना - हो सकता है कि उसे कुछ पता हो ।
इसीलिए कहा गया है कि ज़िंदगी बड़ी पहेली है ।

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